वाराणसी। जनपद के रोहनिया थाने में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। थाना प्रभारी राजू सिं...
वाराणसी। जनपद के रोहनिया थाने में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। थाना प्रभारी राजू सिंह की तहरीर पर प्रह्लाद घाट निवासी भोला प्रसाद जायसवाल और उसके बेटे शुभम जायसवाल सहित कुल 9 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत नया मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, भोला प्रसाद जायसवाल को इस संगठित गिरोह का सरगना बनाया गया है।
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| Purvanchal Samachar |
संगठित अपराध से अर्जित की अकूत संपत्ति
थाना प्रभारी द्वारा दी गई तहरीर में उल्लेख है कि भोला प्रसाद जायसवाल ने एक संगठित गिरोह बनाकर कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और भंडारण का जाल फैला रखा था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य अवैध तरीके से आर्थिक लाभ कमाकर भोग-विलास और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करना है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह न केवल वाराणसी, बल्कि अन्य जनपदों और राज्यों तक अपने पैर पसार चुका है।
इंटरपोल की रडार पर शुभम जायसवाल
इस गिरोह का अहम सदस्य और भोला का बेटा शुभम जायसवाल वर्तमान में विदेश में होने की आशंका है। उसे पकड़ने के लिए इंटरपोल लगातार अन्य देशों के संपर्क में है। पुलिस का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बनाकर जल्द ही उसे गिरफ्तार कर भारत लाया जाएगा।
गैंग के ये सदस्य हैं शामिल:
पुलिस ने भोला प्रसाद के साथ गिरोह के निम्नलिखित 8 सदस्यों को नामजद किया है:
- शुभम जायसवाल (सरगना का बेटा), प्रह्लाद घाट, वाराणसी
- आजाद जायसवाल ,पिशाच मोचन, वाराणसी
- महेश कुमार सिंह, भदवार, रोहनिया
- शिवाकांत उर्फ शिव, कानपुर
- स्वप्निल केशरी, मुगलसराय, चंदौली
- दिनेश कुमार यादव, सप्तसागर, वाराणसी
- आशीष यादव, जैतपुरा, वाराणसी
- सौरभ त्यागी, गाजियाबाद
यह पूरी कार्रवाई पिछले साल 19 नवंबर को भदवर स्थित एक जिम के तहखाने में की गई छापेमारी से जुड़ी है। उस दौरान पुलिस ने 500 पेटी से ज्यादा (18,600 सीसी फेंसाडिल और 75,150 सीसी स्कफ) कफ सिरप बरामद किया था। जांच आगे बढ़ी तो तस्करों का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया, जिसके बाद सभी नौ आरोपितों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
गाजियाबाद से त्रिपुरा तक फैला था नेटवर्क
प्रशासन की अगुवाई में हुई जांच के दौरान जिम के तहखाने से एक अहम ई-वे बिल (e-way bill) हाथ लगा था। इसकी कड़ियाँ जोड़ी गईं तो पता चला कि यह प्रतिबंधित सिरप गाजियाबाद की दवा फर्म 'आरएस फार्मा' ने चंदौली के 'सिंह मोडिकोज' को भेजा था। जांच में गिरोह के तार गाजियाबाद से लेकर पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा तक फैले मिले हैं।
अब आर्थिक चोट की तैयारी
पुलिस अब न केवल आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे रखने के लिए गैंगस्टर एक्ट का सहारा ले रही है, बल्कि उनकी बची-कुची संपत्ति को कुर्क कर सकती है। गिरोह की आर्थिक कमर तोड़ने की भी तैयारी कर चुकी है। प्रशासन का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई से नशीली दवाओं के संगठित व्यापार पर लगाम लगेगी।
